Essay on pollution in india pdf

Essay on Pollution In Hindi | Essay In Hindi About Pollution

Essay on Pollution
प्रदषूण की समस्या पर 250 शब्दो का ननबन्ध लिखो।

Write an Essay on Pollution in about 250 words.
पर्यावरण प्रदूषण उस स्थिति को कहते हैं जब मानव द्वारा पर्यावरण में अवांछित तत्वों एवं ऊर्जा का उस सीमा तक संग्रहण हो जो कि पारिस्थितिकी तंत्र द्वारा आत्मसात न किये जा सकें।

Growing Pollution On Earth Hindi Essay धरती पर बढ़ता प्रदूषण
हमारी धरती आज बहुत समस्याओं से जूझ रही है I इसमें बढ़ता प्रदूषण एक गम्भीर समस्या है I आज जल प्रदूषण, थल प्रदूषण, वायु प्रदूषण और ध्वनि प्रदूषण बहुत विराट समस्या बन चुके हैं I
आज हमारे देश की नदियां बहुत प्रदूषित हो चुकी हैं, नदियों के किनारे लगे कारखाने अपना सारा कूड़ा नदियों मैं फैंक देते हैं I इससे सारी नदियां बहुत प्रदूषित हो चुकी है, कभी जीवनदायनी कहलाने वाली गंगा आज जहरीली हो चुकी है I देश में कारखानों और गाड़ियों की बढ़ती संख्य़ा से हवा भी जहरीली हो गयी है जिसके कारण लोगों में बहुत सारी बीमारियां उत्पन्न हो रही हैं I
वायु प्रदूषण और जल प्रदूषण की वजह से लोग आकस्मिक मौत मर रहे हैं I देश में प्लास्टिक के प्रयोग से मिटटी भी प्रदूषित हो रही है I इसकी उपजाऊ क्षमता बहुत कम हो रही है, फसल में रसायनिक खाद और हानिकारक कैमिकलों के प्रयोग से मिटटी की उर्वरा क्षमता बहुत कमजोर हो गयी है I
इसका मुख्य कारण किसानों में जागरूकता का न होना है I ध्वनि प्रदूषण भी एक भयंकर समस्या है I वाहनों के बढ़ते शोर, लाउड स्पीकरों के शोर से और शादी-समारोह में बढ़ते डी जे के बढ़ते चलन से लोगों में सुनने की क्षमता कम हो रही है, खासकर बच्चे इसका बहुत जल्दी शिकार हो रहे है I प्रदूषण समस्या को रोकने के लिए लोगों का जागरूक होना बहुत जरुरी है I
इन सभी समस्याओं से निजात पाने के लिए लोगों को खुद काम करना पड़ेगा जैसे प्लास्टिक का प्रयोग न करना, शादी-समारोह में डी जे आदि का प्रयोग न करना, धुंआ आदि न फैलाना, पानी में कचरा और कैमिकल न फैंकना I यदि हर व्यक्ति अपनी जिम्मेदारी समझे तो इन भयंकर समस्याओं से आसानी से निपटा जा सकता है I

=========
प्रदूषण प्रतिकूल परिवर्तन का कारण है कि प्राकृतिक वातावरण में contaminants की शुरूआत है. प्रदूषण शोर, गर्मी या प्रकाश के रूप में रासायनिक पदार्थ या ऊर्जा का रूप ले सकता है. प्रदूषण, प्रदूषण के घटकों, विदेशी तत्वों / ऊर्जा या प्राकृतिक रूप से उत्पन्न contaminants या तो किया जा सकता है.
आओ प्रदूषण और उसके नियंत्रण से संबंधित कुछ बुनियादी अवधारणाओं से परिचित हो.

Pollution in any form is harmful & all efforts should be made to avoid it.

Pollution Can take up many forms

  • Air pollution
  • Light pollution
  • Littering
  • Noise pollution
  • Soil contamination
  • Radioactive contamination
  • Thermal pollution
  • Visual pollution
  • Water pollution

Air pollution in major Asian cities is associated with many premature deaths in a year. Highly polluted rivers, inadequate water and sanitation, agricultural and industrial pollution also contribute to freshwater scarcity, poor health, and deaths.

हम शोर के बारे में क्यों चिंता करनी चाहिए ?
ध्वनि प्रदूषण मनुष्य और जीवों पर एक गंभीर प्रभाव लाती है. शोर प्रदूषण के कुछ प्रतिकूल प्रभाव नीचे संक्षेप हैं .

  • झुंझलाहट
  • मनोवैज्ञानिक प्रभाव
  • सुनवाई के नुकसान
  • मानव प्रदर्शन
  • तंत्रिका तंत्र
  • अनिद्रा
  • सामग्री को नुकसान

शोर पर नियंत्रण तकनीकों के प्रकार हैं

· स्रोत पर नियंत्रण
· संचरण पथ में नियंत्रण
· सुरक्षा उपकरण का उपयोग करना.

वायु प्रदूषण के प्रमुख स्रोत

  • कार्बन मोनो आक्साइड (CO)
  • कार्बन डाई आक्साइड (CO2)
  • क्लोरो-फ्लोरो कार्बन (CFC)
  • लैड (Lead)
  • ओजोन (Ozone)
  • नाइट्रोजन आक्साइड (NO)
  • सल्फर डाई आक्साइड (SO2)

भारत सरकार द्वारा पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम 1986 एवं इससे संबंधित नियमावली के अन्‍तर्गत ध्वनि प्रदूषण (विनियमन और नियंत्रण) नियम, 2000 बनाया गया है। इस नियम में अस्पतालों, शैक्षिक संस्थाओं और न्यायालयों के आस-पास कम से कम 100 मीटर तक के क्षेत्र को शान्त क्षेत्र/परिक्षेत्र घोषित किया गया है।

Pollution Essay in Hindi – प्रदूषण की समस्या पर निबंध

Last Updated August 19, 2018 By The Editor Leave a Comment

Pollution Essay in Hindi अर्थात इस article में आपके पढने के लिए प्रदूषण की समस्या पर निबंध दिया गया है, एक नुक्ते बनाकर और एक बिना नुक्ते के.

प्रदूषण की समस्या (Essay 1)

भूमिका

मनुष्य प्रकृति की सर्व श्रेष्ठ रचना है । जब तक वह प्रकृति.के कार्य में हस्तक्षेप नहीं करता तब तक उसका जीवन सहज और स्वाभाविक गति से चलता रहता है । विज्ञान की प्रगति के कारण औद्योगिक विकास में मनुष्य की रुचि इतनी बढ़ गई है कि वह प्रकृति के साथ अपना सामंजस्य प्रायः समाप्त न बैठा है । वैज्ञानिकों का मत है कि प्रकृति में किसी प्रकार की गन्दगी नहीं । उसका बदला हुआ रूप प्राणी जगत् को किसी प्रकार कीं हानि नहीं पहुंचाता ।

प्रदूषण का कारण

आज के औद्योगिक युग में संयन्त्रों, मोटर-वाहनों, रेलों तथा कल-कारखानों की संख्या अत्यधिक बढ़ गई है । उद्योग जितने बढ़ेंगे, उतनी ही ज्यादा गर्मी फैलाएंगे । धूएँ में से कार्बन मोनोक्साइड काफी मात्रा में निकलती है जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होती है । अनुमान लगाया गया है कि 960 किलोमीटर की यात्रा में एक मोटर-वाहन जितनी आक्सीजन का प्रयोग करता है, उतनी आक्सीजन मनुष्य. को एक वर्ष के लिए चाहिए । हवाई जहाज., तेल-शोधन, चीनी-मिट्टी की मिल, चमड़ा, कागज, रबर के कारखाने आदि को ईंधन की आवश्यकता होती है । इस ईंधन के जलने से जो धूँआ उत्पन्न होता है, उससे प्रदूषण फैलता है । यह प्रदूषण एक जगह स्थिर नहीं रहता बल्कि वायु के प्रवाह से यह तीव्र गति से सारे संसार को कुप्रभावित करता है । घनी आबादी वाले क्षेत्र इससे अधिक प्रभावित होते हैं । वायु में प्रदूषण फैलता है और आक्सीजन की कमी होने लगती है ।

प्रदूषण की वृद्धि का कारण

टोकियो विश्व भर में सबसे अधिक प्रदूषित नगर है । यहां पुलिस के लिए जगह-जगह पर ऑक्सीजन के सिलण्डर लगे रहते हैं ताकि जरूरत पड़ने पर वे उनका उपयोग कर सकें । धुएं और कुहरे की स्थिति में हवा को छानने के लिए मुँह पर पट्टी बांधनी पड़ती है । इस पर भी वहां आँख, नाक और गले के रोगों की अधिकता बनी रहती है । लन्दन में चार घण्टों तक ट्रैफिक सम्भालने वाले सिपाही के फेफड़ों में इतना विष भर जाता है मानो उसने 105 सिगरेट पिए हों ।

प्रदूषण की समस्या के पीछे जन वृद्धि का संकट भी काम कर रहा है । इस जनवृद्धि के कारण ग्रामों, नगरों.तथा महानगरों को विस्तार देने की आवश्यकता का अनुभव हो रहा है । परिणामस्वरूप जंगल काटकर वहां बस्तियां बसाई जा रही हैं । वृक्षों और वनस्पतियों की कमी के कारण प्रकृति की स्वाभाविक क्रिया में असन्तुलन पैदा हो गया है । प्रकृति जो जीवनोपयोगी सामग्री जुटाती है, उसकी उपेक्षा हो रही है । प्रकृति का स्वस्थ वातावरण दोषपूर्ण हो गया है । इसी को पर्यावरण या प्रदूषण की समस्या कहा जाता है । कल-कारखानों की अधिकता के कारण वातावरण दूषित होता जा रहा है । वाहनों तथा मशीनों के शोर से ध्वनि प्रदूषण फैलता है जिससे कानों के बहरा हो जाने का डर बना रहता है । मनुष्य अनेक प्रकार के शारीरिक तथा मानसिक रोगों का शिकार बनता जा रहा है ।

नियंत्रण की आवश्यकता

जब तक मनुष्य प्रकृति के साथ तालमेल. स्थापित नहीं करता तब तक उसकी औद्योगिक प्रगति व्यर्थ है । इस प्रगति को नियन्त्रण में रखने की जरूरत है । मशीन हम पर शासन न करे बल्कि हम मशीन पर शासन करें । हम ऐसे औद्योगिक विकास से विमुख रहें, जो हमारे सहज जीवन में बाधा डाले । हम वनों, पर्वतों, जलाशयों और नदियों के लाभ से वंचित न हों । नगरों के साथ — साथ ग्राम भी सम्पन्न बने रहे क्योंकि बहुत-सी बातों में नगर ग्रामों पर निर्भर करते हैं । नगरीय संस्कृति के साथ — साथ ग्रामीण संस्कृति का भी विकास होता रहे ।

समाधान

प्रदूषण की समस्या से बचने के लिए यह जरूरी है कि विषैली गैस, रसायन तथा जल-मल उत्पन्न करने वाले कारखानों को आवास के स्थानों से कहीं दूर खुले स्थानों पर स्थापित किया जाए ताकि नगरवासियों को प्राकृतिक खुराक ( ऑक्सीजन, प्राणवायु) प्राप्त होती रहे । इसके साथ ही नगरों के जल-मल के बाहर निकालने वाले नालों को जमीन के नीचे दबाया जाए ताकि ये वातावरण को प्रदूषित न कर सकें । वन महौत्सव के महत्त्व को समझते हुए बारा-बगीचों का विकास किया जाए । सड़कों के किनारों पर वृक्ष लगाएं जाएं । औद्योगिक उन्नति एवं प्रगति की सार्थकता इसमें है कि मनुष्य सुखी, स्वस्थ एवं सम्पन्न बना रहे । इसके लिए यह जरूरी है कि प्रकृति को सहज रूप से अपना कार्य करने के लिए अधिक-से-अधिक अवसर दिया जाए ।

नीचे प्रदूषण की समस्या पर एक निबंध बिना नुक्ते के भी दिया गया है.

प्रदूषण की समस्या (Problem of Pollution) (Essay 2)

आज का युग विज्ञान का युग है । विज्ञान ने जहां मनुष्य के लिए सुख-सुविधाओं के साधन जुटाए हैं और अनेक समस्याओं का समाधान किया है, वहीं दूसरी ओर उसके आविष्कारों द्वारा ऐसी समस्याएं उत्पन्न हुई हैं कि वे वरदान हमारे लिए अभिशाप बन गए हैं । आज के युग में अनेक समस्याएं हैं । प्रदूषण की समस्या उन समस्याओं में से एक है । प्रदूषण दिन प्रतिदिन विकराल रूप धारण करता जा रहा है । प्रदूषण का अर्थ है दोष से युक्त । नाम से ही ज्ञात होता है कि जिसमें विकार या दोष उत्पन्न हो गए हैं वह प्रदूषित हो जाता है ।

आज विज्ञान के विभिन्न आविष्कारों के कारण ही हमारी संपूर्ण धरती का वातावरण प्रदूषित हो गया है । मानव ने अपने स्वार्थ की पूर्ति के लिए सभी संसाधनों का दुरुपयोग किया है । इसका परिणाम प्रदूषण के रूप मैं हमारे सामने हैं । इस प्रदूषण के कारण वातावरण के प्राकृतिक संतुलन में गड़बड़ी पैदा हो गई है । प्रदूषण अनेक प्रकार का होता है-जल प्रदूषण, भूमि प्रदूषण, वायु दूषण, ध्वनि प्रदूषण । आज की सभ्यता को शहरी सभ्यता कह सकते हैं । भारत के कुछ बड़े महानगरों की जनसंख्या एक करोड़ का आकड़ा पार कर चुकी है ।

इस कारण शहरों की दुर्गति हो गई है । दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई जैसे महानगरों में हर प्रकार का प्रदूषण पांव पसार चुका है । लाखों लोग झुग्गी झोपड़ियों मैं निवास करते हैं जहां धूप, पानी और वायु तक का भी प्रबंध नहीं है । सड़कों पर लाखों की संख्या में चलते वाहन कितना प्रदूषण फैलाते हैं । वृक्षों के उग्भाव मैं यह धुःझां मानव के फेफड़ों में जाता है जिस कारण अनेक प्रकार की बीमारियां पैदा होती हैं । नगरों में जरन के स्त्रोत थी धूपित हो चुके है । ध्वनि प्रदूषण का तो कहना ही क्या? इसके कारण जीवन तनावग्रस्त हो गया है । प्रदूषण को रोकने का सर्वोत्तम उपाय है जनसंख्या पर नियंत्रण ।

सरकार को चाहिए कि वह नगरों की सुविधाएं गांवों तक भी पहुंचाए ताकि शहरीकरण की अंधी दौड़ बंद हो । हरियाली को यथासंभव बढ़ावा देना चाहिए । जगह-जगह वृक्ष लगाने चाहिए । प्रदूषण बढ़ाने वाली फैक्टरियों के प्रदूषित जल एवं कचरे को संसाधित करने का प्रबंध करना चाहिए । जल प्रदूषण से सभी नदियां, नहरें, भूमि दूषित हो रही हैं । परिणामस्वरूप हमें प्रदूषित फसलें मिलती हैं, गंदा जल मिलता है । आजकल वाहनों, फैक्टरियों और मशीनों के सामूहिक शोर से रक्तचाप, मानसिक तनाव, बहरापन आदि बीमारियां बढ़ रही हैं ।

जहाँ जनसंख्या बढ़ती है, वहीं उद्योगों की संख्या भी बढ़ती चली जा रही है । इन्हीं उद्योगों से निकलने वाले जहरीले पदार्थ, रसायन आदि नदी-नालों में बहा दिए जाते हैं जो अपने आसपास के क्षेत्रों में प्रदूषित जल से उत्पन्न रोगों को जन्म देते हैं । नगरों व महानगरों से होकर निकलने वाली नदियों का जल प्रदूषित हो गया है, जिससे उस जल का सेवन करने वाले प्राणी अनेक घातक रोगों से ग्रस्त हो जाते हैं । अधिक पैदावार के लिए जब कीटनाशकों का अधिक प्रयोग किया जाता है तो इनका स्वास्थ्य पर घातक प्रभाव पड़ता है ।

परमाणु शक्ति के उत्पादन ने वायु, जल एवं ध्वनि तीनों प्रकार के प्रदूषण को बढ़ावा दिया है । भूमि पर पड़े कूड़े-कचरे के कारण भूमि प्रदूषण होता है । महानगरों में झुग्गी-झोपड़ियों के कारण भी भूमि प्रदूषण होता है । आवास की समस्या को सुलझाने के लिए वनों की कटाई भी वायु प्रदूषण का मुख्य कारण है । जल प्रदूषण से पेट तथा आतों के रोग जैसे हैजा, पीलिया आदि हो जाते हैँ । ध्वनि प्रदूषण से मानसिक तनाव, उच्च रक्तचाप, हृदय रोग आदि की संभावना रहती है । प्रदूषण के कारण कैंसर, एलर्जी तथा चर्म रोग में भी वृद्धि हो रही है । प्रदूषण की समस्या केवल भारत में ही नहीं है यह पूरे विश्व में विद्यमान है ।

वृक्षारोपण इसे रोकने का सर्वोत्तम उपाय है । वृक्ष हमें ऑक्सीजन देते हैं । वनों की अंधाधुंध कटाई पर रोक लगानी चाहिए । वाहनों के प्रदूषण को रोकने के लिए उनके लिए सी — एन. जी. का प्रयोग अनिवार्य कर देना चाहिए । औद्योगिक इकाईयों द्वारा होने वाले प्रदूषण को रोकने के लिए फैक्टरियां शहर से दूर लगाई जानी चाहिए । प्राकृतिक रूप से बनी खाद के प्रयोग से भूमि प्रदूषण रोका जा सकता है । इसके लिए सभी नागरिकों को एकजुट होकर प्रयास करना होगा ।

Short Essay On Pollution in Hindi – प्रदूषण पर निबंध (Essay 3)

प्रदूषण समाज या जीवन के लिए एक खतरा है सभी प्रकार के प्रदूषण जैसे वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण, ध्वनि प्रदूषण, ध्वनि प्रदूषण, खाद्य प्रदूषण बहुत से लोगों को प्रभावित कर रहा है

स्रोतों या प्रदूषण की उत्पत्ति को संक्षिप्त विवरण में वर्णित किया गया है:

वायु प्रदुषण:

वायु हमारे अस्तित्व के लिए हमारे पर्यावरण के सबसे महत्वपूर्ण तत्वों में से एक है। यह एक प्राकृतिक उपहार और एक मुफ़्त संपत्ति है यह कई मायनों में प्रदूषित है भूमि वाहन तेल और ईंधन का उपयोग करते हैं जो धुआं बनाते हैं। धूम्रपान हवा के साथ मिश्रित हो जाता है और इस प्रकार हवा प्रदूषण करता है मिलों, कारखानों और उद्योगों को भी वायु प्रदूषण के लिए जिम्मेदार ठहराया जाता है क्योंकि वे धूम्रपान करते हैं। प्रदूषित हवा में CO 2 , CO, NO 2 , एसएमपी, एसओ 2 और सीसा के आक्साइड होते हैं। गैसों और रासायनिक प्रदूषण हवा की अत्यधिक वृद्धि ज्यादातर मामलों में लोगों को प्रदूषित हवा में सांस लेना और श्वास करना है।

जल प्रदूषण:

जल जीवित प्राणियों के लिए जीवित तत्वों में से एक है। ज्यादातर मामलों में मिलों, कारखानों और उद्योगों के कचरा द्वारा पानी प्रदूषित है। कुछ समय, किसानों ने कीटनाशक और उर्वरकों का अत्यधिक उपयोग किया।इस प्रदूषित पानी का शराब जीवन और स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है

खाद्य प्रदूषण:

फुटपाथ पर बिक्री के लिए तैयार अधिकांश भोजन और स्नैक्स, सड़क के किनारे सड़क के किनारे खुला है और गंदे हैं वे प्रदूषित हवा के साथ पकाये जाते हैं लोग अपनी आदत और लालच के कारण भोजन और स्वाद लेते हैं। हमारे स्वास्थ्य के लिए ये अस्वस्थ पदार्थ भी हानिकारक हैं

ध्वनि प्रदूषण:

ध्वनि प्रदूषण सभी के लिए बहुत आम है वाहन, मिलों, कारखानों, उद्योगों का शोर वास्तव में उबाऊ और असहनीय है यह सुनवाई, सिरदर्द, मानसिक पीड़ा, तनाव, मानसिक असंतुलन और माइग्रेन का सुस्त कारण भी है।

इन प्रदूषणों से लड़ने के लिए, हमें कुछ चरणों को सुनिश्चित करना चाहिए। हमें धूम्रपान से हवा को प्रदूषित करना बंद कर देना चाहिए इसके लिए, हमें सड़क पर पेट्रोल चालित कारों और वाहनों की मात्रा को कम करना होगा। यदि संभव हो तो, हमें सीसा ऑक्साइड से बचने के लिए होना चाहिए। हमें अधिक से अधिक वृक्ष काटना चाहिए। हमें ताजे सब्जियां खेती करनी चाहिए ताकि हम भोजन प्रदूषण को कम कर सकें। ध्वनि बॉक्स पर हमें ज़ोर से आवाज के साथ गाने नहीं सुनना चाहिए। हमें शहर में इन निर्माण के लिए मिल, कारखाने या उद्योग मालिकों को भी बंद करना चाहिए। इन्हें नियोजित तरीके से बनाया जाना चाहिए।

इसके अंत में पर्यावरण संरक्षण अधिनियम को पर्यावरण प्रदूषित होने से मुक्त बनाने के लिए पारित और लागू किया जाना चाहिए। लोगों को वायु प्रदूषण के खराब प्रभावों के प्रति जागरूक होना चाहिए। इस प्रकार, हम अपनी प्रकृति की सुरक्षा कर सकते हैं।

प्रदूषण की समस्या पर निबंध (Essay 4)

जैसे-जैसे विश्व अधिक से अधिक सभ्य हो जाता है, दुनिया अधिक से अधिक प्रदूषित हो जाती है। बढ़ते प्रदूषण की दर पर हमारे ग्रह में रहने के लिए अजीब हो सकता है

सड़क पर चलने वाले वाहनों की संख्या, जैसे वाहनों की सभी प्रकार जैसे- ऑटो रिक्शा, कार, लॉरी, वैन और मोटरबाइक, कस्बों और शहरों में हवा के प्रदूषण के कारण एमए हैं। गांवों की चरखी कम शहर की तुलना में कमजोर होती है जहरीले गैसों के प्रदूषण से बचने के लिए भाग्यशाली हैं।

हर कोई एक कार खरीदना चाहता है क्योंकि कार ऋण निश्चित आय वाले लोगों के लिए आसानी से उपलब्ध है।पर्यटक कारें बड़ी संख्या में इन दिनों पहले चल रही हैं सड़क पर चलने वाले वाहनों की संख्या कई बार बढ़ी है और कभी-कभी कई बार ट्रैफिक की बोतल गर्दन होती है। उन लोगों से स्वास्थ्य के लिए खतरनाक विषाक्त गैस खतरनाक है। आजकल हर कार के लिए गैस उत्सर्जन परीक्षण किया जाता है ताकि वाहनों द्वारा गैस का उत्सर्जन सीमित हो। गैस के उत्सर्जन को नियंत्रित करने के इस उपाय के बावजूद सड़क पर तेज गति वाले वाहनों के विषाक्त गैस द्वारा परमाणु क्षेत्र के प्रदूषण का खतरा पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। वातावरण के प्रदूषण के लिए कई अन्य कारण हैं।

हमारे पर्यावरण में से एक प्रदूषण कई मायनों में होता है नदियों उनके बैंकों के कारखानों के निर्वासित द्वारा प्रदूषित हैं। नदियों के साथ अत्यधिक जहरीली द्रव्यमान और जल निकासी जल मिश्रण और उन्हें प्रदूषित करते हैं। गंगा, बहुत पवित्र माना जाता है, अत्यधिक प्रदूषित है। जले हुए शवों को अंदर ले जाने और जल निकासी के कई स्थानों पर इसके साथ मिक्स किया जाता है।

कर्नाटक में कैलवारी और कंपाला नदियों में धातु के रसायनों और उन लोगों को त्वचा रोगों का विकास करने वाले लोग शामिल होते हैं। अगर पीने के पानी को जहरीले अपशिष्टों द्वारा प्रदूषित किया जाता है तो यह स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक है। कभी-कभी जल निकासी के पानी को पीने के पानी के साथ मिलाया जाता है और इससे लोगों को बहुत नुकसान होता है

रासायनिक कारखानों द्वारा हवा में विभिन्न प्रकार के गैसों का उत्सर्जन एक अन्य प्रकार के प्रदूषण है। गैस हवा के साथ मिश्रण करते हैं और जब कारखानों के पास रहने वाले लोग उन्हें साँस लेते हैं तो वे छाती रोग विकसित करते हैं। कपड़ा मिलों, रासायनिक कारखानों और विभिन्न प्रकार के वाहनों ने मूर्तिकला के हवा के धुएं और कुछ एसिड में उत्सर्जित किया है। जीवाश्म-ईंधन आधारित उद्योग वातावरण को दूषित करते हैं। पर्यावरणविदों का कहना है कि शहरों की हवा अत्यधिक प्रदूषित है।

जोर से आवाज़ें हवा को प्रदूषित करती हैं और हमारे कान ड्रम को प्रभावित करती हैं। ब्लरिंग टेलीविज़न सेट, रेडियो, एयरप्लेन और हेलीकॉप्टर के कारण शोर भी हवा का एक प्रकार का प्रदूषण है।

हवा में कार्बन डाइऑक्साइड की वृद्धि पेड़ों के विचारहीन कटाई का नतीजा है। यह वैज्ञानिकों द्वारा अनुमान लगाया गया है कि भविष्य में दुनिया का तापमान कम से कम पांच डिग्री सेंटीग्रेड बढ़ा देगा। वर्षा को पैदा करने में वन आवरण प्रमुख भूमिका निभाता है। हाइड्रोजन, क्लोराइड और फ्लोराइड जैसे गैसीय यौगिकों की वृद्धि के कारण, वातावरण में ओजोन परत कम हो जाती है। ओजोन परत की कमी के परिणामस्वरूप दुनिया गर्म और गर्म हो जाएगी।

पर्यावरण प्रदूषण पर निबंध (Essay 5)

इस असंतुलन ने न केवल हमारे जीवन की गुणवत्ता में गिरावट की है बल्कि सभी जीवन के अस्तित्व को भी धमकी दी है। यदि यह असंतुलन एक निश्चित सीमा से परे बढ़ता है, तो वह घातक साबित हो सकता है। कभी और तेज़ी से बढ़ते प्रदूषण वैश्विक चिंता का मामला है, क्योंकि यह किसी विशेष देश, क्षेत्र या भूमि तक सीमित नहीं है। यह पूरी दुनिया के लिए खतरा है और उन्हें एकजुट होना चाहिए।

प्रदूषण की समस्या हमारे झंझट कस्बों और शहरों में अधिक तीव्र है। कभी-कभी बढ़ती उपभोक्तावाद ने समस्या को और बिगड़ दिया है। शहरों और कस्बों के जीवमंडल और पारिस्थितिकी तंत्र तेजी से अपनी आत्म-शक्ति बनाए रखने की शक्ति खो रहा है। शहरों के तेजी से औद्योगिकीकरण ने उन्हें जीवन के लिए लगभग अयोग्य बना दिया है वे धुएं से भरा, हानिकारक धुएं, गंदगी, धूल, कचरा, संक्षारक गैसों, गंदे गंध और गगनभेदी शोर है। कारखानों और मिलों में विभिन्न ईंधन जलाने से बड़ी मात्रा में मूर्तिकला-डाइऑक्साइड हवा में गंभीर प्रदूषण का कारण बनता है। उदाहरण के लिए, दिल्ली में, जनसंख्या का एक बड़ा हिस्सा श्वसन और संबंधित विकारों से ग्रस्त है। मुंबई, कोलकाता और चेन्नई जैसे अन्य महानगरीय शहरों में, स्थिति बेहतर नहीं है। धुम्रपान करने वाले हजारों वाहनों और दिल्ली में असहनीय शोर पैदा करने के कारण स्थिति कई गुना बढ़ गई है।दिल्ली देश में बढ़ते शहरी प्रदूषण और अराजकता का प्रतीक है। वही भाग्य देश के अन्य शहरों का इंतजार कर रहा है।

चूंकि हमारे अधिकांश शहर नदियों या तट के किनारे पर हैं, हमारी नदियों और समुद्र भी बदबूदार और प्रदूषित हो गए हैं और मछलियों और अन्य जीवों में रहने वाले किनारे तट पर सड़ने पाए जाते हैं। शहरों में वातावरण कार्बन मोनोऑक्साइड, मूर्तिकला और नाइट्रोजन के ऑक्साइड, हाइड्रोकार्बन, कीटनाशकों, फ्लाई-राख, सूख और कभी-कभी, रेडियोधर्मी पदार्थ जैसे प्रदूषकों से संतृप्त है। हवा में गंदे गंध और विषाक्त धुएं के साथ गुदगुदी होती है। इन्हें हमारे खाद्य पदार्थों में अपना रास्ता मिल गया है। मिलों और कारखानों से नदियों और समुद्रों में छुट्टी दे रहे जहरीले रसायनों, औद्योगिक अपशिष्ट पदार्थों ने समुद्री जीवन को घातक साबित किया है। कचरे के ढेर, शहरों में बदसूरत टीले में बढ़ते हुए, हमारे अंधे, मूर्ख और एकतरफा शहरी विकास और विकास की एक कहानी बताता है। हमारे गांव भी, इस पारिस्थितिकीय गिरावट से मुक्त नहीं हैं उन्होंने अपने बहुत से जंगलों और चराई खो दिया है प्राकृतिक संसाधनों की कमी और पारिस्थितिकी में असंतुलन हमारे शहर विरोधाभासों के अपने स्वयं के वजन के नीचे गिर जाएगी।

जाहिर है, प्रदूषण ने सभी संतोषजनक सीमाएं पार कर दी हैं और अगर कोई प्रभावी उपाय जल्द ही नहीं लिया गया है, तो परिणाम भयावह साबित हो सकते हैं। शहर के सड़कों पर चलने वाली धुलाई वाले वाहनों को अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। पर्यावरण के अनुकूल वाहनों को सख्ती से प्रतिबंधित किया जाना चाहिए और लगातार प्रदूषण की जांच होनी चाहिए, और नियमों का उल्लंघन करने वालों को पर्याप्त रूप से जुर्माना और दंडित किया जाना चाहिए। उन्हें उत्सर्जन के कुछ न्यूनतम न्यूनतम मानक का पालन करने के लिए मजबूर होना चाहिए।

शोर महान प्रदूषक में से एक है शहरों में सामान्य शोर का स्तर खतरनाक रूप से बढ़ रहा है, जिससे कई मानसिक और शारीरिक बीमारियां पैदा हो रही हैं। कारखानों के वाहनों, रेलगाड़ियों, सार्वजनिक पते प्रणाली, टीवी समूह, विमान और सायरन आदि से शोर वास्तव में बहुत अधिक है। यह साबित हो गया है कि सुरक्षित सीमा से परे शोर विभिन्न प्रकार के विकारों के कारण होता है, दोनों मानसिक और घबराहट एक गड़बड़ी जगह में एकाग्रता मुश्किल है, यदि असंभव नहीं है रचनात्मक और उपयोगी कुछ भी करने के लिए, एकाग्रता एक पूर्व-शर्त है शोर भी हमारे आराम और नींद को प्रभावित करता है और इस प्रकार मनोसामाजिक व्यवहार से संबंधित कई समस्याओं को जन्म देता है। अक्सर जोर से शोर छोटे जहाजों, विद्यार्थियों के फैलाव, मांसपेशियों के तनाव, पाचन की गड़बड़ी, घबराहट, चिंता और चिड़चिड़ापन में रक्त का प्रवाह कम हो सकता है। यह कार्यशीलता को कम करता है शोर का सबसे स्पष्ट प्रभाव सुनने की भावना के क्रमिक नुकसान के रूप में होता है। शोर-नियंत्रक हैं लेकिन सार्वजनिक जागरूकता की कमी के कारण वे बहुत मदद नहीं कर रहे हैंहम खतरे को कुछ हद तक कम कर सकते हैं और अधिक से अधिक वृक्ष लगाकर।

पानी के स्रोतों जैसे नदियों, झीलों, तालाबों और समुद्रों के स्रोतों में प्रदूषण की उपस्थिति एक और महान स्वास्थ्य खतरा है। जल जलाशयों प्रदूषकों से भरे हुए हैं, जिनमें जहरीले रसायनों, औद्योगिक अपशिष्ट, निलंबित ठोस, जैविक और अकार्बनिक पदार्थ और बैक्टीरिया शामिल हैं। सीवरेज ने हमारे जल संसाधनों के स्वास्थ्य को गंभीरता से क्षति पहुंचाई है। डिस्चार्ज में विभिन्न प्रकार के जहरीले पदार्थ होते हैं, जो जल जनित बीमारियों और महामारियों के प्रकोप और प्रसार का कारण बनते हैं। डिटर्जेंट, उर्वरक, कीटनाशक, तेल फैल पानी के अन्य प्रमुख प्रदूषक हैं। वध घरों, डेयरी और मुर्गीपालन खेतों, ब्रुअरीज, टैनरीज़, पेपर और चीनी मिलों से अपशिष्ट कहर का कारण हुआ है।

जल प्रदूषण को रोकने के लिए, सीवरेज और कारखाने के प्रवाह और कचरे को ठीक से इलाज और स्वच्छ, नदियों और समुद्रों में छुट्टी से पहले साफ किया जाना चाहिए। रासायनिक उद्योगों को नदियों और तटों के तट पर स्थित होने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। प्रदूषण नियमों और विनियमों के अवलोकन के संबंध में सख्त नियम होना चाहिए और दोषी को गंभीर रूप से दंडित किया जाना चाहिए। धीरे-धीरे, लोग प्रदूषण की बढ़ती समस्या से अधिक और अधिक जागरूक हो रहे हैं। यह 1974 में भारत सरकार द्वारा पारित किए गए पहले अधिनियम में परिलक्षित होता है, ताकि जल प्रदूषण पर नियंत्रण हो सके। फिर 1980 में वायु प्रदूषण को रोकने के लिए एक और अधिनियम पारित किया गया था। और, आखिरकार, पर्यावरणीय आवश्यकताओं की देखभाल के लिए नवंबर 1980 में पर्यावरण विभाग को एक स्वतंत्र एजेंसी के रूप में बनाया गया था। लेकिन पर्यावरण प्रदूषण की जांच करने के लिए अब तक के उपाय अधिक या कम प्रतीकात्मक और आधे दिल वाले हैं।

हमारे देश में उपलब्ध सभी पानी का 70% से अधिक प्रदूषित है। पानी और हवा की तरह, हमारी मिट्टी प्रदूषित भी हो रही है। यह अनुमान लगाया गया है कि हमारे कुल भूमि क्षेत्र का 35% से अधिक पर्यावरणीय क्षरण से ग्रस्त है। वनों की कटाई और कृत्रिम उर्वरकों और कीटनाशकों का अत्यधिक उपयोग हमारे देश के इस क्षरण के मुख्य कारक हैं। ओवरग्रेजिंग ने समस्या को और भी बिगड़ दिया है। कचरा, कचरा, राख, कीचड़, प्लास्टिक सामग्री, बेकार की बोतलें, और डिब्बे जैसे कई ठोस अपशिष्टों, यहां फेंक दिए गए और वहां वातावरण खराब और प्रदूषित हो गए।

इस खतरे से लड़ने के लिए, जोरदार प्रयास किए जाएं और प्रदूषण विरोधी कानूनों का सख्ती से अभ्यास किया जाना चाहिए। आंदोलन में लोगों की भागीदारी की तलाश के लिए बड़े पैमाने पर मीडिया के माध्यम से किए जाने की जरूरत है। प्रदूषण हमारे लिए और आने वाले पीढ़ियों तक एक बड़ा खतरा और खतरे को धारण करता है। इसलिए, यह टूथ और नाख़ी से लड़ना चाहिए। सौर और पवन ऊर्जा का उपयोग प्रोत्साहित किया जाना चाहिए क्योंकि यह स्वच्छ और प्रदूषण रहित है इस संकट के बारे में जागरूकता बढ़ती जा रही है लेकिन यह देश के प्रदूषण नियंत्रण उपायों से मेल खाती है।

ज़रूर पढ़िए:

हमें पूरी आशा है कि आपको हमारा यह article बहुत ही अच्छा लगा होगा. यदि आपको इसमें कोई भी खामी लगे या आप अपना कोई सुझाव देना चाहें तो आप नीचे comment ज़रूर कीजिये. इसके इलावा आप अपना कोई भी विचार हमसे comment के ज़रिये साँझा करना मत भूलिए. इस blog post को अधिक से अधिक share कीजिये और यदि आप ऐसे ही और रोमांचिक articles, tutorials, guides, quotes, thoughts, slogans, stories इत्यादि कुछ भी हिन्दी में पढना चाहते हैं तो हमें subscribe ज़रूर कीजिये.

Essay on Air pollution: Introduction, Causes, Sources, Impact and Control Measures

Category: Environment, Essays, Paragraphs and Articles On October 31, 2013 By Various Contributors

Introduction and meaning:

Air pollution is the presence of harmful foreign substances (pollutants) in the atmosphere, emitted by both natural and anthropogenic (human activity) sources.

Air pollution is the contamination or presence of unwanted substances in the air making it harmful and detrimental for human and animal health.

Air Pollution is the deterioration of the quality of the air to an extent that:

  • it becomes difficult to breathe, often toxic or detrimental,
  • it complicates the health of living beings,
  • it causes the body organs to malfunction,
  • it damages the habitats of animal, plants, and other living organisms,
  • it poses the threat to the natural environment and its habitats.

Pure air is necessary for our health. Air pollution is the leading cause of several diseases. During the past few years, air pollution has emerged as one of the leading causes of death worldwide.

What causes air pollution?

The air is polluted in different ways. It is polluted through industrialization, urbanization, and motorization. It is polluted by thermal plants, installation of chemical and petrochemical plants and rapid increase of motor vehicles, deforestation and test of modern weapons. Greenhouse gases released by large industries are largely responsible for air pollution.

Air pollutants

Air Pollutants refer to the abnormal substances (solids, liquids, and gases) that are present in air in intolerable limits.

Classification of air pollutants: Air pollutants can also be divided into two categories: primary pollutant and secondary pollutant.

  1. Primary pollutants: Primary pollutants are emitted directly from the sources. The example of primary pollutant includes carbon dioxide (CO2), carbon monoxide (CO), sulfur dioxide, nitric-oxide, ammonia, hydrogen sulphide, and radioactive substances. Industrial fumes and smokes, ash, dust, mist, are other primary sources of air pollution.
  2. Secondary pollutants: The secondary pollutants are not emitted from the sources. They are formed when primary pollutants interact with atmospheric constituents. Example includes sulphur-trioxide (SO3), nitrogen-trioxide, ozone (O3), hydrocarbons, acid rain, etc.

Major Air Pollutants

The pollutants that contribute major portion of global air pollution are:

  1. Sulphur Oxides (SOx): These substances are produced by industry, particularly the industrial combustion of fossil fuels. They are also produced naturally when volcanoes erupt.
  2. Nitrous oxides(N2O): These oxides are released into the atmosphere when industrial combustion occurs at high temperatures.
  3. Carbon monoxide (CO): When fuels (especially wood, oil, coal and natural gas) do not burn ‘cleanly’ (i. e. their combustion is incomplete), they can emit carbon monoxide. One of the main sources of CO is exhaust fumes from vehicles such as cars.
  4. Carbon dioxide (CO2): This noxious gas is another pollutant released when fossil fuels are burnt.
  5. Particulates: Small particles can be released into the air by aerosol use and by the combustion of fossil fuels (for example, soot is released when coal is burned).

Besides above, nitrogen oxide (NOx) and hydrocarbons (H. C.) are major pollutants. Further, organic and inorganic acids, bacteria, viruses, insecticides, etc. pollutes the air.

Sources of air pollutants

Major sources of air pollution includes both natural sources and man-made source (anthropogenic).

A. Natural sources:

The natural sources of air pollutants includes volcanic eruptions, forest fires, deflation of sands and dusts, storms, etc. The major pollutants from natural sources includes:

  • Volcanic pollutants are produced as a result of volcanic activities. Examples: ashes, smokes, carbon dioxide, chlorine, sulfur, dust and other gases.
  • Land surface pollutants often get mixed with earth’s atmosphere. The dust, sand, soil particles, salt, etc. are the examples of land pollutants.
  • The cosmic particles and rays, comets, etc. are the natural sources of air pollution.
  • Green plants and vegetation that produces Volatile organic compounds (VOC) in large quantity are indirect pollutants.

B. Anthropogenic (Man-made sources)

Industries, automobiles, agriculture, power plants, domestic sources, etc. are the man-made or anthropogenic sources of air pollution. Pollutants from anthropogenic sources (human activity or man-made sources) includes:

  • Industrial air pollutants are the harmful substances that are released into the air during the manufacturing, production and other industrial process. The smokes, fumes, etc. emitted from large industries and power plants are the examples of industrial air pollutants. The dust and particulate matters also gets mixed with air to worsen the situation.
  • Domestic air pollutants are the contaminated chemicals and substances that released into the air as a result of household activities. The domestic sources of air pollutant includes gases from kitchen, burning of coal gas, fuel wood, etc.
  • Vehicular pollutants are emitted by various automobiles. The mixes and polluted the air. For example, the smoke, gases, fumes, emissions from surface, water and air transport vehicles causes pollution.
  • Agricultural activities also involves the introduction of pollutants into the environment. When insecticides, pesticides and herbicides are sprayed on agricultural fields, they also get mixed with air. This results to an increase in air pollution of the surrounding environment.
  • Pollutants from fossil-fuel based power plants: The heavy dependence on fossil fuels for meeting the power requirement has done much damage to our environment. When fossil fuels are burnt, the produces several harmful gases including CO2. The heat generated from the power plants negatively affects the environment. The smokes and fly ash that is discharged get mixed with air.

The impact of air pollution.

Air pollution have a negative impact on the environment and the ecosystems within the environment. They are discussed below in points:

1. Acid rain: Acid compounds in the air dissolve into the rain and make the rain acidic. When it falls, acid rain can erode buildings and poison the earth and sea. It also degrades the soil quality, decreases farm output, and damages forests.

2. Smog: Particulates can cause thick, gloomy clouds in the air. This can severely limit visibility, and is a particular problem in big cities where vehicle use is very heavy.

3. Respiratory problems in humans: Sulfides, nitrous oxides and carbon monoxide can all cause respiratory illness in humans In high quantities or over long periods of time, these pollutants can also be fatal.

4. Global warming: Greenhouse gases are a group of pollutants (for instance CO and SO) which form a layer in the atmosphere above the earth which traps in the sun’s rays and causes them to reflect back onto the earth. This warms up the earth and is known as the greenhouse effect because it essentially turns the earth into a giant greenhouse filled with heat.

5. The acidification of the oceans: If the air is polluted, these pollutants can dissolve into the oceans and saturate them with carbon, particulates, sulfides and nitrates. In this way, air pollution turns into water pollution as well, spoiling the habitats of marine and freshwater life.

6. Freak weather: Global warming does not just cause global temperatures of earth and sea to rise. It also causes freak weather events such as huge blizzards, forest fires, tsunamis and so on. This disrupts agriculture, destroys animals’ habitats and causes poverty, drought and the displacement of vast numbers of human beings across the face of the earth.

How to Control Air Pollution?

Much of the air pollution is caused due to human activity. The following remedial measures can be taken to control air pollution:

  • Plant more trees. Trees absorb greenhouses gases such as CO2 and releases O2 into the air.
  • Use fewer vehicles. Vehicles releases much of the pollutants into the air. An alternative way to save air polluting is to start using e-vehicles.
  • Use less fossil fuels. Fossil fuels such as coal, when burned, releases massive quantity of polluting gases into the environment.
  • Make use of Renewable energy. Unlike thermal power plants, that pollutes the air, renewable sources of power such as hydro power, wind power, solar power, etc., are comparatively less polluting.
  • Use green technologies. Unlike traditional factories, that releases a lot of polluting fumes in the air, modern green plants releases a minimal of polluting gases.

Conclusion

Air pollution is a huge problem, and it is one that humans have caused. As such, humans have a responsibility to fix it as well. We should all act now to end air pollution and thus to make the world a happier and healthier place for both humans and animals.

Contributors: (1) Vishal, (2) Laura